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मानव रक्त के बारे में संपूर्ण जानकारी – Structure Of human Red and White Blood Cells

हेलो दोस्तो आपका स्वागत है| Exam Study Materials वेबसाइट पर| आज हम आपको  Structure Of human Red and White Blood Cells यानि मानव रक्त के बारे में संपूर्ण जानकारी दे रहे है| आप इन सभी को ध्यान पूर्वक पढ़े|
आपको आज इस आर्टिकल में हम Human Blood से बनने वाले प्रश्न देंगे| ये सभी प्रश्न आपको एक लाइन में पढ़ने को मिलेंगे| जो जानकरी जरूरी है उसे हम जरूर ऐड करेंगे|
अगर आप इन Science gk को पढ़ते है तो आपका साइंस का कोई भी प्रश्न नौकरी के एग्जाम में गलत नहीं होगा| हमने सभी प्रश्नों को ध्यान से लिखा है|

मानव रक्त के बारे में संपूर्ण जानकारी - Structure Of human Red and White Blood Cells
मानव रक्त के बारे में संपूर्ण जानकारी – Structure Of human Red and White Blood Cells

अगर आपको कोई प्रश्न गलत लगता हैं तो आप हमें सपर्क करके जरूर बताए| जिस भी आर्टिकल में आपको जिस भी प्रश्न के उत्तर में गलती लगती है|

उस आर्टिकल का लिंक हमें भेजे और प्रश्न संख्या बताएगे| हम उसे जल्द ही ठीक करेंगे| मानव रक्त (manav rakt) के बारे में संपूर्ण जानकारी|

Human Blood

मानव रक्त (Human Blood) प्राय: लाल, गाढ़ा, स्वाद में नमकीन तथा अपारदर्शी होता है। एक वयस्क मनुष्य में लगभग 4 से 6 लीटर रक्त होता है। शरीर में रक्त की मात्रा शरीर के भार का 7 प्रतिशत होती है। रक्त के अध्ययन को Haematology कहते हैं। रक्त एक संयोजी ऊतको (Connective tissue) है। रक्त जल से भारी होता है। यह हल्का सा क्षारीय होता है मानव रक्त का pH मान 7.3 – 7.4 होता है| 

Manav Rakt ka ph man

मानव रक्त का pH मान 7.3 – 7.4 होता है| 

Structure Of Human Blood Cells


रक्त के अवयव
प्लाज्मा (Plasma) 
लाल रुधिर कणिकाएँ (Erythrocytes)
श्वेत रुधिर कणिकाएँ (Leukocytes) 
रुधिर प्लेटलेट्स (Thrombocytes) 

प्लाज्मा (Plasma):- यह हल्के पीले रंग का चिपचिपा और थोड़ा क्षारीय (Alkaline) द्रव होता है। यह आयतन के हिसाब से सम्पूर्ण रुधिर का 55 प्रतिशत भाग बनाता है। प्लाजमा में 90 प्रतिशत भाग जल तथा शेष 10 प्रतिशत भाग में प्रोटीन तथा कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ होते हैं।

प्लाज्मा में पाए जान वाले पदार्थ:-

(i) प्रोटीन्स: – फाइब्रिनोजन (Fibrinogen), एल्ब्यूमिन (albumin), ग्लोब्यूलिन (globulin) तथा प्रोथ्रॉम्बिन (Prothrombin) प्लाज्मा में पायी जाने वाली प्रोटीन है। ये सभी यकृत (Liver) में बनती है। ये प्रोटीन रक्त के pH मान ” को नियंत्रित करते हैं।

Albumen तथा globulins प्लाज्मा के Osmotic pressure को नियंत्रित करते हैं, इन प्रोटीन्स की कमी से ऊतको में पानी भर जाता है, जिससे हाथ तथा पैरों में सूजन बढ़ जाती है। कुछ globulins एण्टीबॉडीज (antibodies) का निर्माण करते है। ये एण्टीबॉडीज एण्टीजन्स को निष्क्रय करते है। फ्राइब्रिनोजन तथा प्रोथ्रॉम्बिन रक्त का थक्का जमाने में सहायता करते हैं।

(ii) लवण:- सोडियम, पोटैशियम, मैंग्नीज तथा लोहे के क्लोराइड्स, कार्बोनेट्स, बाइकार्बोनेट्स आदि प्लाज्मा में घुले लवण है।

(III) खाद्य पदार्थ :- ऐमिनोअम्ल (amino acids), फॉलिक अम्ल तथा ग्लूकोज प्लाज्मा में उपस्थित खाद्य पदार्थ है। एक वयस्क मनुष्य में खाना खाने के 12 घंटे बाद ग्लूकोज की मात्रा 80 से 100 मिलीग्राम प्रति 100 ml रक्त होती है। अगर रक्त में ग्लूकोज का स्तर 180mg प्रति 100 ml के स्तर से बढ़ जाए तो डायबटिज, मेलीटस (diabetes mellitus or hyperglycemia) हो जाता है।

(iv) उत्सजी पदार्थ:- यूरिया, यूरिक अम्ल तथा अमोनिया प्लाज्मा में पाए जाने वाले उत्सर्जी पदार्थ हैं। (घलनशील गैसें:- ऑक्सीजन तथा कार्बन-डाई ऑक्साइड मुख्य गैस है जो घुली हुई अवस्था में प्लाज्मा में उपस्थित होती है।

(vi) प्लाज्मा में हार्मोन, विटामिन तथा एंजाइम भी पाए जाते हैं।

(vii) Anticoagulant – प्लाज्मा में एक Anticoagulant हैपरिन पाया जाता है। यह शरीर में रक्त को जमने नहीं देता है। इसका निर्माण यकृत में होता है।

(ix) यकृत cholesterol का निर्माण करता है तथा इसे रक्त में छोड़ता है। सामान्यतः रक्त में इसकी मात्रा 50 से 180 मिलीग्राम प्रति 100 ml होती है।

लाल रुधिर कणिकाएँ (Erythrocytes) – Structure Of human Red Blood Cells

मानव रक्त से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न:-
  • RBC केवल कशेरुकी जन्तुओं (Vertebrates) में पाए जाते हैं। 
  • RBC में हिमोग्लोबिन नामक एक प्रोटिन होता है।
  • हिमोग्लोबिन एक लोहयुक्त प्रोटीन होता है। 
  • हिमोग्लोबिन फेफड़ों से शरीर में ऑक्सीजन को पहँचाता है। 
  • हिमोग्लोबिन ऑक्सीजन से मिलकर ऑक्सी हिमोग्लोबिन नामक यौगिक तथा कार्बन मोनोऑक्साइड से मिलकर कार्बोक्सीहिमोग्लोबिन नामक यौगिक बनाता है। 
  • RBC में केंद्रक नहीं होता है।
  • RBC का औसत जीवनकाल 120 दिन होता है। 
  • हिमोग्लोबिन के कारण रक्त का रंग लाल होता है। 
  • हिमोग्लोबिन की मात्रा कम होने पर रक्त अल्पता रोग हो जाता है। 
  • विटामिन-B12 तथा विटामिन-B9 की कमी से RBC की निर्माण दर घट जाती है। 
  • एक सामान्य स्वस्थ पुरुष में RBC की संख्या 5 मिलियन प्रति घन मिलीमीटर तथा स्त्री में इनकी संख्या 4.5 मिलियन प्रति घन मिली मीटर होती है। 
  • RBC आकार में WBC से छोटी होती है। मनुष्य में RBC व्यास में 7-8 माईक्रोमीटर तथा 2 माईक्रोमीटर मोटी होती है।
  • स्तनधारियों में RBC उभयावतल (biconcave) होती है।
  • ऊँट की RBC में केंद्रक होता है। 
  • कुछ अकशेरुकियो में भी हीमोग्लोबिन होता है, लेकिन यह रुधिर प्लाज्मा में घला होता है। क्योंकि अकशेरुकियों में RBC नहीं होती है। 
  • व्यायाम करते समय तथा पहाडों पर RBC की संख्या बढ़ जाती है, ऑक्सीजन की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए। 
  • RBC ऊतकों से कार्बन डाई ऑक्साइड को / बाइकार्बोनेट्स के रुप में फेफड़ों में पहुँचाती है।
  • RBC का निर्माण अस्थिमज्जा में होता है। तथा प्लीहा को RBC का कब्रिस्तान कहा जाता है। 
  • प्लाज्मा का पीला रंग बिलिरुबीन के कारण होता है।
  • भ्रूण में RBC का निर्माण यकृत में होता है। 
  • खरगोश में RBC का जीवन काल 50-70 दिन तथा मेंढ़क में इनका जीवन काल 100 दिन होता है। कुछ अकशेरुकियो जैसे – Mollusks, Prawan, Crab में एक नीला कॉपर युक्त Pigment हीमोसायेनिन होता है।

श्वेत रुधिर कणिकाए या ल्यकासाइटम – Structure Of human White Blood Cells

WBC की संख्या RBC की अपेक्षा कम होती है। मनुष्य के रुधिर में इनकी संख्या 5000 से 10000 प्रति घन मिली मीटर तक होती है, परंतु संक्रमण के दौरान इनकी संख्या बढ़ जाती है। इनमें केंद्रक होता है। इनका जीवनकाल 34 दिन होता है।

1. कणिकामय श्वेत रुधिराणु या ग्रेन्यूलोसाइट्स। 
2. अकणिकामय श्वेत रुधिराणु या अग्रेन्यूलोसाइट्स।

WBC के प्रकार

ग्रेन्यूलोसाइट्स :- इनके कोशिका द्रव्य में कई प्रकार के कण पाए जाते हैं। इसलिए इनका नाम कणिकामय श्वेत रुधिराणु पड़ा है। ये तीन प्रकार के होते हैं – 1. सोफिल्स 2. ऐसिडोफिल्स या इओसिनोफिल्स 3. न्यूट्रोफिल्स 

बैसोफिल्स :- इनकी संख्या कम होती है। इनमें बड़े कण पाए जाते है जो मेथिलीन ब्ल्यू जैसे क्षारीय अभिरंजको से आसानी से रंगे जा सकते हैं। 

इओसिनोफिल्स या ऐसिडोफिल्स :- एलर्जी के समय इनकी संख्या बढ़ जाती है। इसके कण इओसिन नामक अभिरंजक से आसानी से रंगे जाते हैं। 

न्यूट्रोफिल्स :- WBC में इनकी संख्या सबसे अधिक होती है इनका मुख्य कार्य बैक्टीरिया तथा अन्य बाह्य पदार्थों का भक्षण करना है। 

अकणिकामय श्वेत रुधिराणु या अग्रेन्यूलो साइट्स:- इनके कोशिका द्रव्य में कण नहीं पाए जाते है। ये दो प्रकार के होते हैं। 1.लिम्फोसाइट्स 2. मोनोसाइट्स 

लिम्फोसाइट्स :- ये RBC के आकार के होते हैं। ये घाव भरने में सहायता करते हैं। ये मुख्यतः 2 प्रकार के होते हैं – B- लिम्फोसाइट तथा T – लिम्फोसाइट्स, ये शरीर के लिए आवश्यक प्रतिरक्षियों का निर्माण करते है। 

मोनोसाइट्स :- ये सबसे बड़ी WBC होती हैं। ये भी बैक्टीरिया इत्यादि का भक्षण करते हैं। 

रुधिर प्लेटलेटस या थ्रॉम्बोसाइट क्या है और इसके के कार्य

ये केवल मनुष्य तथा अन्य स्तनधारियों के रुधिर में पाए जाते हैं। इनकी संख्या 250,000 प्रति घन मिली मीटर होती है। इनका जीवनकाल 3 से 7 दिन होता है। इनका मुख्य कार्य चोट लगने पर रेक्त का थक्का जमाना है। इनके अतिरिक्त विटामिन- K, प्रोथ्रोम्बिन, फाइब्रिनोजन तथा पोटाश एलम भी रक्त का थक्का जमाने में सहायक होते हैं।

रक्त से संबंधित रोगों (बीमारियां)

  1. एनिमिया :- इसमें मानव शरीर में हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। इसे दूर करने के लिए गुड़ आंवला तथा हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
  2. ल्यूकेमिया :- यह रक्त से जुड़ा आनुवांशिक रोग है। इसे रक्त का केंसर भी कहा जाता है। यह रक्त में श्वेत रक्त कणिकाओं की मात्रा की असाधारण वृद्धि से होता है। 
  3. ‘हिमोफिलिया :- यह रक्त से जुड़ा आनुवांशिक रोग है। इस रोग में चोट लगने पर रक्त का थक्का नहीं जमता है। तथा छोटी सी चोट लगने पर भी अत्याधिक रक्त बहने से व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है। 
  4. थैलेसिमिया :- यह रक्त से जुड़ा अनुवांशिक रोग है। इसमें रक्त की हिमोग्लोबिन के निर्माण की क्षमता घट जाती है। 
  5. सिक्किल सैल एनिमिया :- यह भी रक्त से जुड़ा अनुवांशिक रोग है। इसमें आर.बी.सी. के आकार में विकृत्ति आ जाती है। 
  6. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस :- यदि पिता का रक्त Rhहो तथा माता का रक्त Rh हो तो जन्म लेने वाले शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था अथवा जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो जाती है। (ऐसा प्रथम संतान के बाद की संतान होने पर होता है।) 

मानव रक्त से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

  • उच्च रक्तदाब को हाईपर टेंशन कहते हैं।
  • निम्न रक्त दाब को हाईपो टेंशन कहते हैं। 
  • ‘O’ रक्त समह में कोई भी एन्टीजन नहीं होता। इसलिए ‘O’ रक्त समूह किसी को भी दिया जा सकता है।
  • पहाड़ों तथा व्यायाम करने पर शरीर की अतिरिक्त ऑक्सीजन की माँग को पूरा करने के लिए लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है। 
  • रक्त दाब को स्फिगमो मैनोमीटर के द्वारा मापा जाता है। 
  • डेंगू ज्वर के कारण मानव शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। 
  • आर.बी.सी की संख्या हीमोसाइटोमीटर से ज्ञात की जाती है। 
  • प्रोटीन, आयरन, विटामिन B12 एवं फोलिक अम्ल आर.बी.सी. के निर्माण में सहायक होते हैं। 
  • आर.बी.सी. में केंद्रक नहीं होता है लेकिन ऊँट एवं लामा नामक स्तनधारी की आर.बी.सी. में केंद्रक २ पाया जाता है।
  • आर.बी.सी. एवं डब्ल्यूबीसी का अनुपात 600 : 1 होता है।
  • मानव रक्त का pH मान 7.3 – 7.4 होता है| 
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