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Raja Ram Mohan Roy Wikipedia in Hindi 2022 – पूरी जानकारी

 Raja Ram Mohan Roy Wikipedia in Hindi 2022 – राजा राम मोहन राय भारतीय पुनर्जागरण के जनक थे, आज हम इनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें जानेगे|

आज हमारे Raja Ram Mohan Roy की नई दिल्ली में 250वीं जयंती मनाई गई है|


Raja Ram Mohan Roy


Raja Ram Mohan Roy के बारे में जानकारी


Raja Ram Mohan Roy अत्यधिक सम्मानित व्यक्ति रहे है, अपने सामाजिक सुधारों के लिए आज हम उन्हें याद करते है| आइए जानते है उन्होंने भारत के समाज को कैसे एक नई दिशा दी|  


उन्हें ‘आधुनिक भारत का जनक’ और ‘भारतीय पुनर्जागरण का जनक’ कहा जाता है। उन्हें ‘बंगाल पुनर्जागरण का जनक’ भी Raja Ram Mohan Roy को कहा जाता है। 


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राजा राम मोहन राय का जन्म पश्चिम बंगाल के राधानगर गांव में एक संपन्न परिवार में हुआ था। बड़े होकर वे एक बहुत बड़े विद्वान और समाज सुधारक बने। राजा राम मोहन राय शुरू से ही रूढ़िवादी धार्मिक प्रथाओं के खिलाफ रहे। 


वह मूर्ति पूजा के खिलाप थे, अंधविश्वास, अंध विश्वास और काले जादू के खिलाफ उन्होंने बहुत जोर लगया। इसके अलावा, वह परिवर्तन लाने में सक्षम रहे थे|


राजा राम मोहन राय के प्रयासों से भारत में सती प्रथा और बाल विवाह के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुगल शासक अकबर द्वितीय ने राम मोहन राय को ‘राजा’ की उपाधि दी थी।


ध्यान दे हम यहाँ अकबर की बात नहीं कर रहे है हम उनके पोते अकबर द्वितीय की बात कर रहे है|


यहाँ भारत के महान विद्वान Raja Ram Mohan Roy के बारे में कुछ तथ्य दिए गए हैं:


Raja Ram Mohan Roy Wikipedia in Hindi 2022 के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी


Raja Ram Mohan Roy एक बहुत ही बड़े विद्वान थे, जो संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेजी, बंगाली और हिंदी जैसी कई भाषाओं में पारंगत थे।


Raja Ram Mohan Roy जी मूर्ति पूजा और हिंदू धर्म के रूढ़िवादी अनुष्ठानों के खिलाफ थे। उन्हें वैज्ञानिक स्वभाव के समर्थन के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।


उन्होंने अपने गांव में औपचारिक शिक्षा प्राप्त की और फिर पटना के एक मदरसे में फारसी और अरबी का अध्ययन किया। इसके अलावा, वे वेद और उपनिषद जैसे संस्कृत और हिंदू शास्त्रों को सीखने के लिए बनारस गए। उन्होंने वेदों और उपनिषदों का बंगाली, हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद किया।


Raja Ram Mohan Roy पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारत में अंग्रेजी माध्यम का स्कूल शुरू किया। उन्होंने 1816 में कोलकाता में एक स्कूल शुरू किया। बाद में, यह एंग्लो-हिंदू स्कूल बन गय था|


1822 में Raja Ram Mohan Roy ने फ़ारसी में एक पत्रिका प्रकाशित की। इसे मिरात-उल-अकबर कहा जाता था। उसी साल उन्होंने ‘संबद कौमुदी’ अखबार की स्थापना की थी।


भारतीय समाज में सुधार और आधुनिकीकरण के उद्देश्य से Raja Ram Mohan Roy ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की।


अपने भाई की चिता में कूदकर भाभी की मृत्यु के बाद, रॉय ने भारत में सती प्रथा का विरोध करने की ठानी। उन्होंने सती प्रथा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। रॉय ने सती प्रथा को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों को कई याचिकाएँ भी लिखीं। अंतत: 1829 में अंग्रेजों ने सती प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया।


राजा राम मोहन राय ने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा और बहुविवाह का भी खुल कर विरोध किया।


Raja Ram Mohan Roy को अकबर द्वितीय ने ‘राजा’ की उपाधि दी थी, जिन्होंने उन्हें अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए इंग्लैंड भेजा था।


Raja Ram Mohan Roy की मृत्यु 1833 में मेनिनजाइटिस के कारण ब्रिस्टल, इंग्लैंड में हुई थी। उन्हें अर्नोस वेले कब्रिस्तान में दफनाया गया था जहां आज भी एक मकबरा खड़ा है। हाल ही में ब्रिटिश सरकार ने ब्रिस्टल में एक सड़क का नाम ‘राजा राममोहन वे’ रखा।



Raja Ram Mohan Roy video by Rathee Sir - यह वीडियो हमनें दुरू राठी के चैनल से लिया है।


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