Father of constitution of india

हेल्लो दोस्त आप गूगल पर सर्च कर रहे थे की भारत के सविधान के पिता कोन है या father of constitution of india तो हमारे सविधान के पिता का नाम भीमराव रामजी अंबेडकर Bhimrao Ramji Ambedkar है इनके बारे में हम आपको और भी कुछ महत्वपूर्ण जानकरी देगे जो आपके काम आएगी|

Father of constitution of india

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जब हमारा सविधान का निर्माण किया जा रहा था तो भीमराव रामजी अंबेडकर ने ही दलितों के लिए आरक्षण की माग की थी जो की 10 वर्षो के लिए दिया जाना था लेकिन बाद की सरकारों ने इसे अपने फायदे के लिए 10 वर्ष और बढ़ाया|
Bhimrao Ramji Ambedka सविधान निर्माताओं में सबसे अधिक पढ़े लिखे थे इनकी अधिक योग्यता के कारण इन्हें सविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष बनाया गया था इनसे पहले अस्थाई अध्यक्ष सच्चीदानंद सिन्हा जी थे जो सिफ 2 दिन के लिए अध्यक्ष बने| अंबेडकर को पारूप समिति का भी अध्यक्ष चुना गया था|
जब भारत आजाद हुवा तो अंबेडकर को स्वतंत्र भारत का पहले कानून मत्री का पद दिया गया| अंबेडकर का देहांत 6 दिसंबर के दिन 1956 में  दिल्ली में हुवा| अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल के दिन 1891 में हुवा| इनका समाधि स्थल महाराष्ट्र के महा नगर मुंबई, में चैत्य भूमि पर है| इनके मरने के बाद भारत सरकार ने इन्हें भारत रत्न से समानित किया| इनकी पत्नी का नाम रमाबाई था और इनकी चार संताने थी| इन्होने दूसरा विवाह भी किया था इनकी दूसरी पत्नी का नाम डॉक्टर शारदा कबीर  था|

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अंबेडकर ने दलितों के लिए बहुत ही राहत के कार्य किए 15 घंटे काम की जगह इन्होंने ने दलितों के लिए 8 घंटे काम का प्रावधान किया| इन्होंने ने अनुछेद 370 का विरुद्ध अपनी आवज उठाई लेकिन जवाहरलाल के कहने पर इन्होने सविधान के निर्माण में आगे चलकर कोई विरोध नही किया| ये छूवा छूत के विरोधी थे|
अंबेडकर को पढने में बहुत रूचि थी इन्होने अपने जीवन में बहुत से पुस्तकें पढ़ी| लेकिन बाद में इन्होंने लिखना शुरू किया| जिसमे इनकी पहली पुस्तक #एडमिनिस्ट्रेशन. एंड. फिनांसेज़. ऑफ़ द ईस्ट. इण्डिया कंपनी थी इन्होने कुल 32 पुस्तके लिखी इसके अर्तिक्त ये पत्र कार भी थे इनके सभी अखवार मराठी भाषा में छपते थे|
आजादी के बाद से लेकर इनपर या इनके जीवन पर अब तक 15 फिल्मे बन चुकी है सबसे पहली फिल्म इनके जीवन पर बनी भीम गर्जना  थी जो 1990 में मराठी भाषामें बनी पहली फिल्म थी इन film के विजय पवार निर्देशित थे आंबेडकर का रोल प्ले कृष्णानंद ने किया| फिल्मो के साथ साथ ही इनपर टेलीविजन पर नाटक बने जो संख्या में अब तक कुल 5 है|
इन्हें कुछ महत्वपूर्ण समान भी दिए गये जैसे डॉक्टर ऑफ लॉज 1952 में दिया गया था और डॉक्टर ऑफ लिटरेचर 1953 में दिया गया था इनके मरने के बाद इन्हें भारत रत्न से भी समानित किया गया|
अम्बेडकर की याद में बहुत से शिल्प करो में समर्पित स्मारक और संग्रहालय भी बनाए जिनमे सबसे पहले नागपुर ज़िला के चिचोली गाँव के अंदर शांतिवन वस्तु संग्रहालय बनाया गया था इस वस्तु संग्रहालय  में आम्बेडकर से जुडी पुस्तके व कुछ महत्वपूर्ण चीजे रखी है|

Father of constitution of india  Bhimrao Ramji Ambedkar के द्वारा बोले गये अनमोल वचन

हमारे सविधान के पिता का नाम भीमराव रामजी अंबेडकर Bhimrao Ramji Ambedkar है जिन्होंने देश की जनत्ता के लिए एक बहुत ही अच्छा सविधान तैयार किया उसके साथ ही इन्होने देश के लोगो को बहुत ही अनमोल वाक्य भी दिए जो लोगो को मोटिवेट करे आइये जानते है की father of constitution of india Bhimrao Ramji Ambedkar ने वो कोन से महत्वपूर्ण शब्द कहे है|

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# अनमोल वचन लिस्ट
1 अम्बेडकर ने लोगो को शिक्षित बने और एक साथ रहने के लिए प्रेरित किया था लेकिन आज भारत में इन राज नेताओ ने लोगो में जाति वाद फेक दिया है|
2 अम्बेडकर एक बात हमेशा कहते थे की वे लोग कभी इतिहास (History) नहीं बना सकते, जो इतिहास (History) को भूल जाते है और आज वर्तमान में लोग यही कर रहे है देश के इतिहास (History) को भूल रहे है|
3 अम्बेडकर को कुछ लोगो ने दबाने की कोशिश की लेकिन उनके होसले मजबूत थे और उन्होंने कहा मुझे दबाना तुमे महगा पड़ेगा क्युकी मै एक बिज हु|
4 अम्बेडकर हमेसा कहा करते थे दुसरो के सहारे मत चलो कूद को इस काबिल बनावो की दुसरे तुम्हे देख कर खुद में भी होसला बरे और आगे बडे|
5 अम्बेडकर लोगो को हमेसा यही समझाते थे की एक महान व्यक्ति वही है जो दुसरो के लिए जीता है इस लिए देश और समाज के लिए कार्य करना सर्वप्रथम हमारा कर्तव्य है|
6 अम्बेडकर ने भारत के सविधान के बारे में कहा अगर इसका दूरउपयोग हुवा तो सबसे पहले मै इसे आग लगा दुगा और आज इसका दूरउपयोग हो भी रहा है लेकिन जनता को सिर्फ अपने फायदे ही दीखते है जैसे एक आरक्षण इसका उदाहरण है अम्बेडकर ने इसे 10 वर्षो के लिए दिया था लेकिन ये राज नेता अपने फायदे के लिए जनता को एक द्पोसला दिए हुवे है और देश का भेडा गर्क होने को है|
7 अम्बेडकर कहते थे जीवन चाहे छोटा हो लेकिन महान हो लोगों की नजरो में हमारी इजत हो|
8 अम्बेडकर कहते थे कानून or व्यवस्था राज. नीतिक शरीर की एक दवा (ओषधि ) है or जब राज. नीतिक शरीर बीमार होने लगे तो दवा (ओषधि ) को प्रशासित करना जरूरी है| जैसे सविधान में बहुत से संसोधन जरूरी है एक उदाहरण अनुछेद 370 में|
9 उन्होंने हमेसा अपने विचारो का प्रचार किया लोगो को इसका एक उदाहरण देकर वो समझाते भी थे की विचार को प्रचार की जरूरत होती है जैसे किसी पोधे को पानी की अगर उसे पानी ना मिले तो वह सूखने लेगे गा वैसे ही विचार का अगर हम प्रचार नही करेगे तो वह भी मुरझा जाएंगे or मर जा एगा|

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