Haryana folk religion description in Hindi 2021

Haryana folk religion description in Hindi 2021 – हरियाणा में भारतवर्ष को दर्शन और धर्म की दृष्टि से विश्वपटल पर बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. भारतीय समाज में धार्मिक विविधता के साथ-साथ हमें लोकधर्म की क्षेत्रीय स्तर पर हमें बहुत सी धाराएँ देखने को मिलती है. हरियाणा प्रदेश की भूमि को वेद, उपनिषद, महाभारत, पुराण, गीता आदि की रचना-स्थली भी माना गया है. इसे महाराजा हर्ष, सूरदास और बाणभट्ट|

जैसे महान व्यक्तित्वों की भूमि के साथ-साथ लोकभाषा का साहित्य का सृजनस्थल भी रहा है. लेकिन वर्तमान में हम वैश्वीकरण, सांस्कृतिकरण, और ब्राह्मणीकरण के चलते हम उन वैचारिक, सामाजिक और राजनैतिक प्रभाव डालने वाली संस्थाओं के महत्व को भूलाकर देश के सांस्कृतिक और दार्शनिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं. प्रस्तुत लेख में हरियाणा राज्य में दर्शन और लोकधर्म के विषय पर प्रकाश डालना मुख्य उद्देश्य है.

विषय वस्तु – Haryana folk religion description in Hindi 2021

  • मुख्य विषय को हम निम्नलिखित उपशीर्षकों के अंतर्गत समझ सकते हैं।
  • दर्शन का परिचय
  • वैदिक-उपनिषद दर्शन
  • शैव एवं शाम्य दर्शन
  • लौकिक दर्शन (रामायण एव महाभारत)
  • बौद्ध दर्शन
  • संत साहित्य
  • सफी साहित्य
  • सुधारवादी एवं राष्ट्रिय विचारक
  • भकादमिक क्षेत्र में दर्शन की वर्तमान स्थिति
  • लावायमा पन माहिराया
  • लोकधमा बाइमामला
  • निष्कर्ष
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दर्शन का परिचय

.* दर्शन को परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि मानव- जीवन के विविध पक्षों का बौद्धिक अवधारणात्मक चिन्तन या ऐसे चिन्तन का आलोचनात्मक मूल्यांकन दर्शन है| 

(Pure rational conceptual thought regarding different aspects of human life or a critical thought over such kind of thought may be called as philosophy.)” (देशराज सिरसवाल (2011).

– डॉ ए के सिन्हा के अनुसार, दार्शनिक चिन्तन मानव प्रकृति का स्वभावात लक्षण है. किसी भी देश, समाज, अथवा प्रान्त में व्यक्ति की समाज एवं वातावरण के प्रति निरतर प्रतिक्रिया होती है। इस प्रतिक्रिया के माध्यम से बसपनाप्रिय तथा अंतर्दृष्टि सम्पन्न व्यक्ति विश्व और मानव समाज के बारे में दार्शनिक निष्कर्ष निकलते है ये विशेष व्यक्ति अपने दार्शनिक चिन्तन का युक्तिपूर्ण प्रतिपादन करते हैं. 

उका दार्शनिक चिन्तन राक्लपणी होने के कारण चन्तनशील व्यक्तियों के उपर अपना प्रभाव छोड़ता है. ये चिन्तनशील व्यक्ति अपने चिलन का प्रपर लेण्या भाषा शिक्षण वार्तालाप इत्यादि दवारा आम जनता में करते समय बोलने के साथ यह ताशनिक चिन्तन धार्मिक नतिक एवं सौंदर्य सम्वनी वनमम कमसिमित हो जातायात विश्वास किसी भी समाज में राति, परम्परा और मान्यता बन जाते हैं। (डॉ साधु राम शारदा) (स)  १९८७), २५५.

वैदिक-उपनिषद दर्शन

वैदिक-उपनिषद दर्शन का प्रभाव हरियाणा के जनमानस पर हमें स्पष्ट दिखाई देता है. ऐसा माना जाता है कि वेद- उपनिषद दर्शन का काफी अंश हरियाणा की भूमि पर रचित है. वैदिक ऋषियों ने एक विश्वव्यापक शाश्वत नियम की कल्पना की थी. उन्होंने इस नियम को ‘ऋत कहा है यही प्राकृतिक, सामाजिक एवं नैतिक नियमों का आधार है|

वेदों में एक ही परमेश्वर पर बल दिया गया है. विशेषरूप से अग्वेद में तत्व को एक माना गया है. ऋग्वेद के अनुसार तत्व एक है किन्तु दार्शनिक उसी एक ही तत्व को विभिन्न रूप से व्याख्या करते हैं. अंत में इन्ही परमपुरुष की उपनिषदों में निर्गुण ब्रहम के रूप में कल्पना की है.

भारतीय दर्शन के अंतर्गत 9 दर्शन आते हैं जिन्हें आस्तिक और नास्तिक की श्रेणी में विभक्त किया है जो निम्नलिखित है।

  • आस्तिक दर्शन न्याय रीषिक सख्य योग मीमामा वेदान
  • नास्तिक दर्शन गवाक नगर

शैव एवं शाक्य दर्शन

वैदिक धर्म-दर्शन से पूर्व के लोगों सैन्धव सभ्यता’ का धर्म-विश्वास वैदिक धर्मावलम्बी लोगों से अलग था. कहा गया है कि, “ये लोग मोटे रूप से द्वीदेवतावादी थे, जिसमें पुरुष के रूप में वे एक तीन मुख वाले योगी की पूजा करते थे, जिसे हम शिव का रूप मान सकते हैं.’ (के सी. यादव तथा एस. ओर. फोगाट (1991), पृ.66) मातृदेवी, पशुओं इत्यादि की भी पूजा करने वाले इन लोगों का धार्मिक जीवन सीधा था.

शिव परब्रह्म है वे शिव को सर्वोच्च मानते हैं.

विश्व जननी शक्ति का वर्णन वेदों में भी पाया जाता है. मार्कडेय पुराण में देवी को जगत जननी कहा गया है. देवी विश्व रचियता है..

हरियाणा के प्राचीन लोगों की शैव एवं शाक्य दर्शन में काफी आस्था रही है. ते शिव दर्शन के मल सिद्धांतों को स्वीकार करते हैं. उनका विश्वास अन्य दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के साथ मिश्रित हो गया है और यह मिश्रित धारणायें परम्परा के रूप में समाज में विद्यमान है। (डॉ. साधू राम शारदा (सं) (1978), 4.250)

बौद्ध एवं जैन दर्शन

हरियाणा के इतिहास को जब हम गौर से देखते हैं तो हम पाते हैं की बुद्ध को शिक्षा और बौद्ध राजाओं का यहाँ काफी प्रभाव रहा है. स्वयं बुद्ध के यहाँ प्रवचन करने के प्रमाण मिलते हैं. बौध साहित्य से हमें पता चलता है. कैथल, अग्रोहा, रोहतक और कलानौर आदि जगह पर बुद्ध ने प्रवचन किया तथा हिसार और थानेसर बौद्ध धर्म के अच्छे के द्र बन गये थे. (के सी. यादव तथा एस. आर. फोगाट (1991), 4.670

ऐतिहासिक तौर पर देखा जाये तो हरियाणा में जैन दर्शन का भी प्रचार हुआ लेकिन बौद्ध दर्शन जितना नहीं. अग्रोहा और रोहतक में जैन धर्म के केंद्र, बौद्ध धर्म के पतन के बाद बने, 

यह बहुत ही मजेदार बात है। की वैदिक दर्शन का केंद्र होने के बावजूद ये दो दर्शन अपनी जगह जनमानस में बना पाए और यह तभी सम्भव हो सका जब यह के लोगों ने धार्मिक संकीणीला

शैव एवं शाक्य दर्शन

वैदिक धर्म-दर्शन से पूर्व के लोगों सैन्धव सभ्यता’ का धर्म-विश्वास वैदिक धर्मावलम्बी लोगों से अलग था. कहा गया है कि, “ये लोग मोटे रूप से द्वीदेवतावादी थे, जिसमें पुरुष के रूप में वे एक तीन मुख वाले योगी की पूजा करते थे, जिसे हम शिव का रूप मान सकते हैं.’ (के सी. यादव तथा एस. ओर. फोगाट (1991), पृ.66) मातृदेवी, पशुओं इत्यादि की भी पूजा करने वाले इन लोगों का धार्मिक जीवन सीधा था.

शिव परब्रह्म है वे शिव को सर्वोच्च मानते हैं.

विश्व जननी शक्ति का वर्णन वेदों में भी पाया जाता है. मार्कडेय पुराण में देवी को जगत जननी कहा गया है. देवी विश्व रचियता है..

हरियाणा के प्राचीन लोगों की शैव एवं शाक्य दर्शन में काफी आस्था रही है. ते शिव दर्शन के मल सिद्धांतों को स्वीकार करते हैं. उनका विश्वास अन्य दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के साथ मिश्रित हो गया है और यह मिश्रित धारणायें परम्परा के रूप में समाज में विद्यमान है। (डॉ. साधू राम शारदा (सं) (1978), 4.250)

बौद्ध एवं जैन दर्शन

हरियाणा के इतिहास को जब हम गौर से देखते हैं तो हम पाते हैं की बुद्ध को शिक्षा और बौद्ध राजाओं का यहाँ काफी प्रभाव रहा है. स्वयं बुद्ध के यहाँ प्रवचन करने के प्रमाण मिलते हैं. बौध साहित्य से हमें पता चलता है. कैथल, अग्रोहा, रोहतक और कलानौर आदि जगह पर बुद्ध ने प्रवचन किया तथा हिसार और थानेसर बौद्ध धर्म के अच्छे के द्र बन गये थे. (के सी. यादव तथा एस. आर. फोगाट (1991), 4.670

ऐतिहासिक तौर पर देखा जाये तो हरियाणा में जैन दर्शन का भी प्रचार हुआ लेकिन बौद्ध दर्शन जितना नहीं. अग्रोहा और रोहतक में जैन धर्म के केंद्र, बौद्ध धर्म के पतन के बाद बने, 

यह बहुत ही मजेदार बात है। की वैदिक दर्शन का केंद्र होने के बावजूद ये दो दर्शन अपनी जगह जनमानस में बना पाए और यह तभी सम्भव हो सका जब यह के लोगों ने धार्मिक संकीणीला को जीवन में स्थान नहीं दिया|

इसके बारे में हम कल अपडेट करेंग| आप कल स्याम 8pm पर फिर देखे|

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