माइक्रोसॉफ्ट विंडोज क्या है?

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आज के समय में भारत में सबसे अधिक यूज होने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट विंडोज है, और आज हम Microsoft Windows kya hai इसके बारे में जानेगे.

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माइक्रोसॉफ्ट विंडोज क्या है?

माइक्रोसॉफ्ट विंडोज, पर्सनल कम्प्यूटर के लिए माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित ऑपरेटिंग सिस्टम है। माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स तथा पॉल एलेन हैं। विश्व के लगभग 90% पर्सनल कम्प्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोग हो रहा। यह ग्राफिकल यूजर (GUI), इंटरफेस, मल्टीटास्किंग, वर्चुअल मेमोरी की सुविधा देता है।

माइक्रोसॉफ्ट विंडोज का प्रथम स्वतंत्र संस्करण 1.0 20 नवम्बर 1985 में आया, जिसे इंटरफेस मैनेजर के नाम से जाना जाता था। परन्तु माइक्रोसॉफ्ट के मार्केटिंग प्रमुख रॉलैन्ड हैन्सन (Rowland Hanson ) ने विंडोज नाम का सुझाव दिया, जो उपभोक्ताओं को ज्यादा आकर्षक लगा। विंडोज 1.0 पूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं था, यह MS-DOS का सुधरा रूप था, जिसमें MS-DOS की कमियों को सुधारने की कोशिश की गई थी।

माइक्रोसॉफ्ट का दूसरा संस्करण 2.0, 9 दिसम्बर 1987 में आया, जो विंडोज 1.0 से थोड़ा ज्यादा लोकप्रिय हुआ, जिसका कारण था इस संस्करण में एक्सल, वर्ड तथा नई ग्राफिकल अनुप्रयोग का होना।

जब एल्डस पेजमेकर ( Aldus Pagemaker) विंडोज संस्करण में आया, उस समय माइक्रोसॉफ्ट विंडोज काफी लोकप्रिय हुआ। जो केवल मैकिन्टोस (Macintosh) सिस्टम परचलता था। यह विंडोज की सफलता की शुरुआत थी। इसके बाद इसके बहुत सारे संस्करणआये। जैसे- 2.0X, 2.03, 3.0 इत्यादि । विंडोज 3.0 सन् 1990 में आया जो अत्यधिक सफल हुआ । इस संस्करण में मल्टीटास्किंग तथा वर्चुअल मेमोरी का परिचय दिया गया जो DOS की तुलना में काफी अच्छा था।

इसके बाद विंडोज अत्यधिक लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम हो गया। जिसके लगातार नये संस्करण आते गये जो आज तक लोकप्रिय है। जैसे

  1. विंडोज 95- सन् 1995
  2. विंडोज ME (Millennium)- सन् 2000
  3. विंडोज Vista- सन् 2007
  4. विंडोज 98- सन् 1998
  5. विंडोज XP- सन् 2004

एम एस विंडोज संबंधी शब्दावली (MS-Windows related Terms)

1. ग्राफिक्स यूजर इंटरफेस (GUI-Graphical User Interface): ग्रफिकल यूजर इंटरफेस यूजर को इलेक्ट्रॉनिक यंत्र, जैसे– कम्प्यूटर, MP3 प्लेयर, पोर्टबल मीडिया प्लेयर आदि से संवाद (intract) करने में सक्षम बनाता है। GUI टेक्सट आधारित संवाद के बदले चित्र या रेखाचित्र के माध्यम से संवाद करना उपलब्ध कराता है। इसके लिए पढ़ने लिखने या कमांड याद रखने की आवश्यकता नहीं होती है। यह यूजर को सरलता तथा प्रभावी रूप से संवाद स्थापित करने में सहायता करता है। सर्वप्रथम जेरोक्स कॉरपोरेशन नाम कंपनी ने GUI पर आधारित जेरोक्स स्टार नामक कम्प्यूटर का विकास किया ।

2. आइकन (Icon): आइकन छोटा सा ग्राफिक फोटो है जो किसी भी प्रोग्राम के क्रियान्वयन का प्रतिनिधित्व करता है। जब हम माउस द्वारा इस आइकन पर क्लिक करते हैं तो इससे संबंधित प्रोग्राम क्रियान्वित (execute) हो जाता है। इनका प्रयोग विंडो वातावरण में होता है। इनके द्वारा प्रोग्राम फाइल तथा फोल्डर डेस्कटॉप को दर्शाया जाता है तथा इनके नीचे प्रोग्राम, फाइल या फोल्डर का नाम लिखा होता है।

3. इंटरफेस (Interface):  यह दो कम्प्यूटर के बीच संचार स्थापित करने की सुविधा या तकनीक है। दो नेटवर्कों या टर्मिनल और नेटवर्क के बीच संचार स्थापित करने की सुविधा को नेटवर्क इंटरफेस कहते हैं।

विंडोज डेस्कटॉप (Windows Desktop) क्या है?

जब कम्प्यूटर सिस्टम में बूटिंग की प्रक्रिया सम्पन्न हो जाती है तब जो स्क्रीन हमारे सामने दिखता है वह डेस्कटॉप है। यह सभी कार्यक्रमों ( Programs) तथा उन तक पहुँचने के लिए आवश्यक निर्देशों (Commands ) की पृष्ठभूमि है। डेस्कटॉप हर ऑपरेटिंग सिस्टम तथा हर संस्करण में बदलता रहता है। डेस्कटॉप के ग्राफिक पृष्ठभूमि को वॉल पेपर कहते हैं। वॉल पेपर को ‘कन्ट्रोल पैनल में डिस्पले प्रोपर्टीज के ‘डेस्कटॉप’ ऑप्सन में जाकर फोटो या चित्र या विभिन्न पैटर्न में बदला जा सकता है। कम्प्यूटर स्क्रीन पर ब्लिंक (Blink) करने वाले प्रतिक को कर्सर कहते हैं।

अन्य महत्त्वपूर्ण सुविधा (Feature ) डेस्कटॉप पर प्राप्त है वो आइकन हैं। यह प्रोग्राम से जुड़ा शार्टकट छोटा चित्र है। इस आइकन पर डबल क्लिक करने पर प्रोग्राम रन ( Run ) होता है या वह फाइल खुलता है। यूजर अपनी सुविधा के लिए प्रोग्राम का शार्टकट बना कर डेस्कटॉप पर रख सकते हैं तथा तीव्रता से उसे चला सकते हैं। आइकन को क्लिक और ड्रैग एण्ड ड्रॉप के द्वारा डेस्कटॉप पर कहीं भी ले जाया जा सकता है।

डेस्कटॉप पर कुछ महत्वपूर्ण आइकन के नाम:

1. माई कम्प्यूटर (My Computer): यह डेस्कटॉप पर एक महत्वपूर्ण आइकन है जो ड्राइव्स (Drives), प्रिन्टर्स, कंट्रोल पैनल और दूसरे सिस्टम अनुप्रयोग (System application) उपयोग करने में सक्षम बनाता है। दूसरे सर्पोटिंग अनुप्रयोग, जैसे- ‘Add New Hardwax’, Add / Remove Program’, ‘Accessibility option’ एवं कंट्रोल पैनल के द्वारा की-बोर्ड, माउस, प्रिन्टर, मॉडम, मॉनीटर डिस्पले और साउन्ड के सेटिंग में परिवर्तन कर सकते हैं।

2. रिसाईकल बीन (Recycle Bin): जब हम किसी फाइल तथा फोल्डर को हटाते (Delete) हैं, तो यह रिसाईकल बीन में जाता है। वहाँ तब तक रहता है जबतक रिसाईकल बीन को खाली न कर दिया जाये ! यहाँ स्टोर फाइल या फोल्डर को रिस्टोर द्वारा वापस अपने जगह लाया जा सकता है। जब रिसाईकल बीन खाली किया जाता है तो सभी deleted files स्थायी रूप से हट जाता है।

3. माई नेटवर्क प्लेसेज (My Network Places): इसके अन्तर्ग नेटवर्क कनेक्शन दर्शाया जाता है। जो सिस्टम को इंटरनेट से जोड़ना संभव बनाता है। जिससे दूसरे कम्प्यूटर के साथ संचार स्थापित करने तथा दूसरे के संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं ।

4. माई डाक्यूमेंट (My Document): यह कम्प्यूटर के हार्ड ड्राइव में एक विशेष फोल्डर है, जिसका उपयोग यूजर अपनी पर्सनल डाक्यूमेंट, संगीत, चित्र, डाउनलोड और दूसरे फाइलों को संग्रहीत करने के लिए करता है।

टास्क बार (Task Bar) क्या है?

डेस्कटॉप के नीचे किनारे पर एक पतली पट्टी जैसा बॉक्स होता है जिसके एक छोर पर स्टार्ट बटन तथा दूसरे छोर पर घड़ी (clock ) रहता है। टास्कबार पर घड़ी की तरफ कुछ और छोटे-छोटे आइकन रहते हैं, जिसे त्वरित लाँच (Quick Launch) कहते हैं। यह, अक्सर उपयोग होने वाले प्रोग्राम को एक क्लिक में खोलता (Open) हैं ।

टास्क बार में कोई परिवर्तन करने के लिए स्टार्ट मेन्यू में सेटिंग विकल्प को चुना जाता है। सेटिंग के सब मेन्यू में Taskbar and Start Menu विकल्प पर क्लिक करने पर Taskbar | and Start Menu प्रोपर्टीज विंडो खुल जाता है।

इस विंडों में निम्नलिखित विकल्प होते हैं, जिनको हम अपने अनुसार चयन कर सकते हैं:

  1. Keep the taskbar on top: इसे क्लिक करने पर यह हमेशा स्क्रीन के नीचे स्थित रहता है।
  2. Group similar taskbar buttons: एक ही प्रोग्राम से खोले गये विभिन्न चीजों (Item) को एक जगह समूह में रखता है। जब टास्कबार में हर बटन को दिखाने के लिए समुचित स्थान नहीं होता है तब यह संभव होता है।
  3. Lock the taskbar: इसे क्लिक करने पर यह टास्कबार के आकार को निश्चित कर देता है।
  4. Auto hide the taskbar: उपयोग न होने पर टास्कबार छिप जाता है तथा माउस प्वाइंटर को वहाँ ले जाने पर दिखाई देता है ।
  5. Show Quick Launch: इस पर क्लिक करने पर प्रोग्राम के शॉर्टकट Taskbar में आ जाते हैं ।
  6. Show the clock: इसे क्लिक करने पर टास्क बार के सबसे दाहिनी ओर घड़ी प्रदर्शित रहती है।
  7. Hide Inactive Icons: जो प्रोग्राम तुरंत उपयोग नहीं हो रहे होते हैं वो इस विकल्प पर क्लिक करने पर छिप जाते हैं।

स्टार्ट मेन्यू (Start Menu) क्या है?

टास्कबार के स्टार्ट बटन पर क्लिक करने पर एक मेन्यू खुलता है जिसे स्टार्ट मेन्यू कहते हैं। इस मेन्यू में कई ऑप्सन आते हैं। कुछ ऑप्सन के साथ छोटा सा तीर का निशान रहता है जो किसी और मेन्यू को दर्शाता है या उस निशान पर माउस के प्वाइंटर ले जाने पर एक और मेन्यू खुल जाता है। स्टार्ट मेन्यू में निम्नलिखित ऑप्सन होते हैं।

  1. प्रोग्राम ( Program): यह कम्प्यूटर में इंस्टाल्ड ( Installed) प्रोग्रामों की सूची है।
  2. फेवरिट (Favorites): यह बुक मार्कड (Book Marked) वेब पेज का सूची है।
  3. डाक्यूमेंट (Documents): सबसे वर्तमान में उपयोग किये गये दस्तावेजों की सूची है।
  4. सेटिंग्स (Settings): सिस्टम अनुप्रयोग जैसे- कंट्रोलपैनल, प्रिन्टर, टास्कबार और मेन्यू तथा नेटवर्क कनेक्शन इत्यादि की सूची है। कंट्रोल पैनल के द्वारा किसी भी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर के सेटिंग्स में परिवर्तन कर सकते हैं।
  5. सर्च (Search): किसी विशेष फाइल या फोल्डर्स को ढूँढ़ने के लिए।
  6. हेल्प (Help ): प्रोग्राम संबंधी कोई भी सहायता प्राप्त करने के लिए।
  7. रन (Run): किसी प्रोग्राम को रन करने के लिए या किसी फाइल, फोल्डर या दस्तावेज को खोलने के लिए।
  8. लॉग ऑफ (Log Off): पासवर्ड प्रोटेक्ट एक उपयोगकर्ता को लॉग ऑफ करने तथा दूसरे उपयोगकर्ता को लॉग ऑन करने की अनुमति देता है।
  9. टर्न ऑफ या शट डाउन (Turn off or Shut down) : सिस्टम को बंद करता है restart करता है।

टाइटल बार  (Title Bar) क्या है?

कोई भी प्रोग्राम या अनुप्रयोग विंडो के अन्दर रन करता है। हर विंडो में सबसे ऊपर एक पतला पट्टी जैसा बॉक्स होता है जिसके बायें तरफ प्रोग्राम या फाइल या फोल्डर, जो भी खुला रहता है उसका नाम लिखा होता है। इस बॉक्स के दाहिने तरफ तीन छोटे-छोटे बटन होते हैं। पर इसे स्क्रीन से हटा देता है परन्तु प्रोग्राम रन करता रहता है। Minimize विंडो टास्क बार इन तीनों में सबसे बायाँ बटन को Minimize बटन कहते हैं। विंडो को मिनीमाइज करने में एक बटन के रूप में उपस्थित रहता है। टास्कबार में उठा हुआ (Raised Button) बटन Minimized या निष्क्रिय विंडो दर्शाता है तथा दबा हुआ बटन (Depressed Button) खुला या सक्रिय विंडो दर्शाता है। यदि यूजर प्रोग्राम को तुरंत उपयोग नहीं कर रहा है परन्तु जल्द ही उसे उपयोग करने वाला है उस स्थिति में Minimize बटन सहायक होता है। Minimized विंडो को फिर से सक्रिय करने के लिए टास्क बार में उस बटन पर सिर्फ एक क्लिक करना होता है ।

टाइटल बार के दायें बटनों में से बीच वाला बटन में एक या दो छोटे-छोटे वर्ग अर्थात् बने होते हैं। जिसे Maximize या Resize बटन कहते हैं। यह बटन यूजर को विंडो को पूर्ण स्क्रीन (Full Screen) या छोटा स्क्रीन (Small screen) करने की सुविधा देता है । टाइटल बार के सबसे दायाँ बटन है, जिसे क्लोज (close) बटन कहते हैं। इस बटन को क्लिक कर विंडो को बंद किया जाता है।

स्क्रॉल बार (Scroll Bar) क्या है?

विंडो के वर्क एरिया में फाइल या फोल्डर की सूची, टाइपिंग, ड्राइंग या दूसरे कार्यों को स्क्राल बार की सहायता से पुर्णतः देख सकते हैं। इस विंडो के दाहिने तरफ उर्ध्वाधर तथा नीचे तरफ क्षैतिज स्क्रॉल बार दिखता है। जब विंडो में सूचनाओं का आकार विंडो के आकार से बड़ा होता है तब स्क्रॉल बार प्रदर्शित होता है। स्क्रॉल बार को खिसका कर सूचनाओं को ऊपर-नीचे तथा दायें-बायें कर देखा जा सकता है ।

मेन्यू बार (Menu Bar) क्या है?

विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम में हर विंडो का अपना मेन्यू होता है। टाइटल बार के तुरंत नीचे मेन्यू बार होता है। इस मेन्यू बार के विकल्प हर प्रोग्राम के अनुसार बदलते रहते हैं।

मेन्यू बार के कुछ मुख्य विकल्प निम्नलिखित हैं—

  1. फाइल (File) : इस मेन्यू के अन्तर्गत न्यू, ओपेन, सेभ, क्लोज तथा प्रिंट इत्यादि विकल्प हैं।
  2. इडिट (Edit) : इस मेन्यू के अन्तर्गत अनडू (undo), कट (cut), कॉपी (copy), पेस्ट ( paste ) तथा क्लियर ( clear) इत्यादि विकल्प हैं।
  3. ब्यू (View ): इस मेन्यू के अन्तर्गत नार्मल (Normal), प्रिन्ट लेआउट (Print Layout), हेडर-फुटर (Header and Footer) इत्यादि विकल्प हैं।
  4. हेल्प (Help): इस मेन्यू के अन्तर्गत सहायक जानकारी या उपयोगो ट्यूटोरियल (Tutorials) होते हैं।

मेन्यू के प्रकार (Types of Menu) ) क्या है?

सामान्यतः मेन्यू दो प्रकार के होते हैं—

  • Pull / Drop Down Menu : किसी विषय को क्लिक करने पर यह मन्यू उसके नीचे खुलता है।
  • Pull / up Menu: किसी विषय पर क्लिक करने पर यह मन्यू उसके ऊपर खुलता है। किसी भी मेन्यू पर माउस द्वारा क्लिक कर या Alt Key के साथ विकल्प का रेखांकित अक्षर दबाने पर उस मन्यू को खोला जा सकता है। मेन्यू में प्रयुक्त कुछ संकेत निम्नलिखित हैं

(i) त्रिभुज 4 : मेन्यू के विकल्प के सामने छोटा सा त्रिभुज बना होता है जो बताता है कि इस विकल्प के अन्तर्गत सब मेन्यू है ।

(ii) (…) इलिप्सिस (Ellipsys) : यह किसी-किसी विकल्प के साथ रहता है जो बताता है कि इस विकल्प पर क्लिक करने पर एक डायलॉग बॉक्स आयेगा जिसमें सूचनाओं को भरना या चुनना होगा ।

(iii) (.) डॉट : यह विकल्प के बायीं ओर रहता है जो यह दर्शाता है कि उपलब्ध विकल्पों में से केवल एक को ही चुना जा सकता है।

(iv) (✔️) चेक मार्क : जो सक्रिय विकल्प हैं उसके आगे यह मार्क लगा होता है।

(v) ग्रे विकल्प : किसी विकल्प का हल्का या ग्रे रंग यह बताता है कि वह विकल्प सक्रिय नहीं है।

टूल बार (Tool Bar) क्या है?

मन्यू बार के नीचे अक्सर टूल बार होता है जिसके अन्तर्गत कमांड आइकन या विकल्पों का पतला लम्बा बॉक्स होता है जो प्रोग्राम के अन्दर किसी विशेष प्रक्रिया को करना संभव करता है। इनमें आइकन या विकल्पों को अपनी आवश्यकतानुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता है।

शॉर्टकट बटन (Shortcut Keys) क्या है?

यह बटन विकल्प के सामने लिखा होते हैं। अगर हम की-बोर्ड पर कार्य कर रहें हैं तो  विकल्प को भी की-बोर्ड से चुन सकते हैं। जैसे- Open विकल्प को क्लिक करने के बदले Ctrl + O बटन की-बोर्ड दबाकर फाइल या फोल्डर कुछ भी खोला जा सकता है। Ctrl के साथ किस बटन को दबाना है यह उस विकल्प में अंडरलाइन शब्द है जो याद रखना होता है ।

डायलॉग बॉक्स (Dialog Box) क्या है?

यह सेकेंडरी विंडो है जिसमें बटन तथा भिन्न-भिन्न प्रकार के विकल्प रहते हैं जिसके द्वारा किसी विशेष कमांड या टास्क को पूरा कर सकते हैं। इस बॉक्स के टाइटल बार में भी अन्य विंडो की तरह बॉक्स का नाम, क्लोज तथा हेल्प बटन होता है।

डायलॉग बॉक्स के तत्व (Elements of Dialog Box) क्या है?

डायलॉग बॉक्स के निम्नलिखित तत्त्व हैं:

OK बटन. इस बटन पर क्लिक करने पर डायलॉग बॉक्स बंद होता है तथा हमारे द्वारा किये गये परिवर्तनों को ग्रहण करता है।

Cancel बटन: इस बटन पर क्लिक करने पर हमारे द्वारा किये गये परिवर्तनों को अस्वीकार कर डायलॉग बॉक्स बंद होता है।

Apply बटन: इस बटन पर क्लिक करने पर हमारे द्वारा किये गये परिवर्तनों को ग्रहण कर, डायलॉग बॉक्स को खुला छोड़ देता है ।

Tab: डायलॉग बॉक्स के विभिन्न पृष्ठ का चयन करने लिए के Tab बटन क्लिक करते हैं। डायलॉग बॉक्स के विकल्पों को अलग-अलग पृष्ठों में व्यवस्थित किया जाता है। प्रत्येक पृष्ठ का नाम Tab बटन पर अंकित है। ये सारे टैब बटन डायलॉग बॉक्स के टाइटल बार के नीचे एक पंक्ति में स्थित रहते हैं। इन सारे Tab बटन में से एक समय में एक ही बटन सक्रिय रहता है। जैसे- पेज सेटअप के डायलॉग बॉक्स में अक्सर तीन Tab बटन होते हैं मार्जिन, पेपर तथा लेआउट ।

Check box: यह विकल्पों के बगल में एक छोटा बॉक्स है। किसी विकल्प को चुनने के लिए इच्छित बॉक्स पर क्लिक करते हैं। उसी बॉक्स पर फिर से क्लिक करने पर विकल्प अचयनित (deselect) हो जाता है। एक समय में एक से अधिक विकल्पों का चयन किया जा सकता है 

Option बटन इस तरह के बटन को रेडियो बटन भी कहते हैं। किसी एक विकल्प एक ही बटन का चयन हो सकता है। विकल्प के बायें बने गोल बटन में बिन्दु चुने हुए विकल्प को दर्शाता है।

Combo box : इस बॉक्स में इच्छित सूचना को टाइप करते हैं, या ड्रॉप डाउन सूची प्रदर्शित करने के लिए बगल में बने तीर (Arrow) के निशान पर क्लिक करते हैं और तब सूची में इच्छित विकल्प पर क्लिक करते हैं ।

Text box : इस बॉक्स में इच्छित सूचना को टाइप करते हैं। पहले से भरी सूचनाअगर इच्छित सूचना नहीं है तो उसे Delete या Back Space द्वारा हटाकर नयी सूचना टाइप करते हैं ।

Drop-down list box ; ड्रॉप डाउन सूची प्रदर्शित करने के लिए इस वाक्य में बने arrow के निशान पर क्लिक करते हैं। फिर सूची से इच्छित विकल्प पर क्लिक करते हैं।

Spin box : इस बॉक्स के दाहिनी ओर स्थित अप और डाउन तीर के निशान पर क्लिक कर बॉक्स में अंकित संख्यात्मक मान को बढ़ाते या घटाते है

हेल्प इन विंडो (Help in Window) क्या है?

विंडोज में किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए स्टार्ट मेन्यू (Start Menu) फलस्वरूप हेल्प एंड सपोर्ट का डायलॉग विडो खुल जाता है जहाँ हम हेल्प टॉपिक चुन सकते हैं। खोल कर उसके हेल्प एंड सर्पोट (Help and Support) विकल्प पर क्लिक करते हैं। जिसके या सर्च ऑप्शन (Search option) में अपने इच्छित विषय को टाइप कर सर्च कर सकते हैं। | विषय चयन कर या टाइप कर क्लिक करने पर उससे संबंधित जानकारी हमें प्राप्त हो सकती है।

कम्प्यूटर में दिन व समय बदलना (To change date and time in computer):

प्रथम विधि में इसके लिए दाहिनी ओर स्थित घड़ी पर डबल क्लिक कर डेट/टाइम प्रोपर्टीज विंडो खोलते हैं तथा डेट/टाइम परिवर्तन कर अप्लाई (Apply) बटन दबा कर नये दिन तथा समय को कम्प्यूटर में निश्चित कर देते हैं।

दूसरी विधि में स्टार्ट मेन्यू (Start Menu) के सेटिंग विकल्प के सबमेन्यू से कंट्रोल पैनल को खोलते हैं। कंट्रोल पैनल विंडो खुलने पर डेट / टाइम विकल्प पर डबल क्लिक करने पर डेट / टाइम प्रोपर्टीज विंडो खुलता है, जहाँ हम दिन तथा समय में परिवर्तन कर सकते हैं।

कम्प्प्यूटर स्क्रीन के स्वरूप तथा बैकग्राउण्ड में परिवर्तन:

कम्प्यूटर स्क्रीन के स्वरूप तथा बैकग्राउण्ड में रूपान्तरण करने के लिए स्टार्ट मेनु के विकल्प का चयन करते हैं। फिर सेटिंग के ड्रॉप डाउन सूची से कंट्रोल पैनल विकल्प का चयन करते हैं। कंट्रोल पैनेल विंडो खुलने पर डिस्पले आइकन पर डबल क्लिक करते हैं जिसके फलस्वरूप डिस्पले प्रोपर्टीज का विंडो खुलता है। जिनमें निम्नलिखित विकल्प होते हैं—

1. Themes: थीम विजुअल तत्वों का समूह है जो हमारे डेस्कटॉप को पर्सनलाइज करता है। थीम हमारे सिस्टम के विभिन्न ग्राफिक तत्त्वों, जैसे- विंडो, आइकन, फॉन्ट, रंग तथा स्क्रीनसेवर चित्रों का निर्णय करता है। यह किसी घटनाओं से संयुक्त ध्वनि का निर्धारण करता है। जैसे– किसी प्रोग्राम के खुलने तथा बंद होने पर कोई ध्वनि उत्पन्न होना।

2. Desktop: इस विकल्प के अन्तर्गत स्क्रीन बैकग्राउण्ड के लिए अपना डिजाइन, फोटो या विंडोज द्वारा प्रदान किये गये चित्र या डिजाइन का चुनाव कर सकते हैं।

 3. Screen Saver: यह हमारे स्क्रीन पर गतिशील चित्र, पैटर्न या तस्वीर है। जब हम किसी निश्चित अंतराल के लिए माउस या की-बोर्ड का उपयोग नहीं करते हैं तब यह प्रदर्शित होता है। की-बोर्ड के किसी भी बटन या माउस को दबाने पर यह बंद हो जाता है।

4. Appearance: यह स्क्रीन पर मेन्यू, फॉन्ट, आइकन तथा दूसरे विंडोज तत्त्वों के प्रदर्शन को निर्धारित करता है। यहाँ हम इन सभी में परिवर्तन कर अपने स्क्रीन में कुछ परिवर्तन कर सकते हैं।
5. Settings: इस विकल्प के द्वारा हम रंगों की गुणवत्ता तथा स्क्रीन की तीव्रता (Resolution) को घटा-बढ़ा सकते हैं; तथा यहाँ उपस्थित Troubleshoot विकल्प का चयन कर डिस्पले से जुड़ी छोटी-मोटी कठिनाइयों को दूर कर सकते हैं।

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