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Samanya Vigyan in Hindi Pdf Free Download

हम आपको Samanya Vigyan in Hindi Pdf Free Download करने के लिए दे रहे हैं| अगर आप ऑनलाइन पढ़ना चाहते है तो पढ़ भी सकते है|

ये सभी सामान्य विज्ञान के प्रश्न आपको हिंदी में मिलेंगे| ये सभी प्रश्न आपको पूरी जानकारी के साथ मिलगे जिन्हें समझने में आपको आसानी होगी|

अगर आप इन्हें पढ़ते है तो आप  railway के सभी एग्जाम, delhi police के एग्जाम, ssc, hssc व अन्य स्टेट के सभी एग्जाम में आपको प्रश्न देखने को जरूर मिलेंगे|आइए अब samanya vigyan question answer in hindi को पढ़ लेते हैं|

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नोट – हम जिस भी शब्द को गहरा बोल्ड, या किसी रंग से हाई लाइट करेंगे समझ लेना की वह सरकारी नौकरी के एग्जाम के लिए जरूरी पश्न हो सकता हैं|

All Samanya Vigyan Question Answer in Hindi 2020

सदिश राशि कौन सी होती हैं ? – विस्थापन, वेग, त्वरण बल, संवेग, आवेग, बल-आधूण

आदिश राशि कौन सी होती हैं ? – द्रव्यमान, दरी, क्षेत्रफल, आयतन, घनत्व, समय, ऊजा, काय, विद्युत आवेश, ताप आदि।

न्यूटन का गति-नियम की परिभाषा क्या हैं|

सबसे पहले हम प्रथम नियम के बारे में जानें गए साथ में कुछ उदाहरण भी समझेगे|

(i) प्रथम नियम क्या हैं?

प्रत्येक वस्तु अपनी विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था बनाए रखती है जब तक कि उस वस्तु पर कोई बाह्य असन्तुलित बल कार्य न करे।

प्रथम नियम में जड़त्व का नियम अन्तर्निहित है।

प्रथम नियम से बल की परिभाषा प्राप्त होती है।

उदाहरण – गतिशील वस्तु पर/में सवार व्यक्ति, वस्तु के अचानक रूक जाने पर आगे की ओर झुक जाता है एवं स्थिर वस्तु के अचानक गतिशील हो जाने पर सवार व्यक्ति पीछे की ओर झुक जाता है; गोली मारने पर काँच में गोल छेद हो जाता है; कम्बल/कोट को डण्डे से प्रहार करने पर धूल-कण झड़ जाती है।

(ii) द्वितीय नियम क्या हैं ?

वस्तु में उत्पन्न त्वरण वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होता है तथा त्वरण की दिशा बल की दिशा में होती है। द्वितीय नियम से बल का व्यंजक (F = M x A) प्राप्त होता है।

उदाहरण – क्रिकेट बॉल का कैच’ लेते समय खिलाड़ी अपने हाथ को पीछे की ओर खींचता है; गाड़ियों में स्प्रिंग एवं शॉक एब्जार्बर लगाया जाता है ताकि झटका कम लगे; कील को अधिक गहराई तक गाड़ने के लिए भारी हथौड़े का प्रयोग किया जाता है।

(iii) तृतीय नियम क्या हैं ?

प्रत्येक क्रिया के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। तृतीय नियम को ‘क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम’ भी कहा जाता है।

उदाहरण – बन्दूक से गोली निकलने पर पीछे की ओर झटका लगना, रॉकेट का आगे बढ़ना, नाव से जमीन पर कूदने पर नाव का विरीत दिशा में अथवा पीछे हटना।

सामान्य विज्ञान के कुछ अन्य महत्वपूर्ण पॉइंट

रॉकेट प्रणोदन, न्यूटन के गति का तृतीय नियम अथवा संवेग-संरक्षण नियम को अभिव्यक्त करता है।

भूस्थिर उपग्रह (geostationary satellite) के भूस्थिर कक्षा (geostationary orhit) की ऊँचाई पृथ्वी की सतह से लगभग 35800 किमी होती है।

पलायन वेग (escape velocity) वह न्यूनतम वेग है जिसके साथ वस्तु को उर्ध्वाधर दिशा में फेंकने पर वह अन्नत तक पहुँच सके।

किसी वस्तु का पलायन वेग उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

किसी वस्तु का पृथ्वी पर से पलायन वेग 11.2 km/s तथा चन्द्रमा पर से पलायन वेग 2.37 km/s होता है।

पलायन वेग काफी कम होने के कारण चन्द्रमा पर कोई वायुमण्डल नहीं होता|

ऐसे उपकरण जो ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदल सकते हैं

उपकरणऊर्जा का रूपान्तरण
माइक्रोफोनध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
लाऊडस्पीकरविद्युत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में
डायनेमोयान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
विद्युत मोटरविद्युत ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में
सौर सेलप्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
बल्बविद्युत ऊर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में
सितारयान्त्रिक ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में
इंजनऊष्मा ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में
विभिन्न उपकरणों द्वारा ऊजो का रूपान्तर

दर्पण के उपयोग Samanya Vigyan के महत्वपूर्ण प्रश्न

अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण (Converging mirror) और उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण (Diverging mirror) भी कहते है

समतल दर्पण का उपयोग आइना, पेरिस्कोप (परिदर्शी), कैलीडोस्कोप (बहुरूपदर्शी) में होता है।

पेरिस्कोप में दो समतल दर्पण एक-दूसरे से 45° के कोण पर स्थित होते हैं।

कैलीडोस्कोप में तीन आयताकार समतल दर्पण एक-दूसरे से 60° के कोण पर
स्थित होते हैं।

अवतल दर्पण का उपयोग सोलर कूकर में, हजामती दर्पण में, परावर्तन दूरबीनों में, सर्चलाइट में, मोटरगाड़ी के हेडलाइट में, टार्च में, दन्त-चिकित्सक द्वारा तथा कान, नाक अथवा गले के आन्तरिक भागों की जाँच हेतु डॉक्टर द्वारा किया
जाता है।

उत्तल दर्पण का उपयोग वाहन में चालक हेतु साईड मिरर या बैक मिरर में, सड़कों पर बल्व के ऊपर परावर्तक के रूप में तथा प्रदर्शन कक्ष में छोटा प्रतिबिम्ब बनाने के लिए किया जाता है

प्रकाशीय घटनाओं के व्यावहारिक परिणाम

(i) अपवर्तन –

  • अपवर्तन के कारण जल में आंशिक तिरछी डूबी छड़ सतह पर मुड़ी हुई नजर आती है।
  • तारों का टिमटिमाना, जल से भरे बीकर में अवस्थित सिक्के का ऊपर उठा दिखाई देना,
  • सूर्योदय के समय सूर्य का चिपटा दिखाई देना
  • जल के अन्दर मछली का वास्तविक गहराई से ऊपर दिखाई पड़ना,
  • पानी से भरी बाल्टी की गहराई कम प्रतीत होना आदि अपवर्तन के उदाहरण हैं।

(ii) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन

पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण घटने वाला घटनाएँ हैं-

  • इन्द्रधनुष का बनना,
  • हीरा का अत्याधिक चमकीला दिखाइ पड़ना,
  • पानी में बुलबुले का चमकना,
  • मरूस्थल में मरीचिका का दिखाइ देना
  • जल में डूबी खोखली परखनली का चमकीला दिखाई पड़ना,
  • काँच के चटके हुए भाग का चमकीला दिखाई पड़ना आदि।
  • प्रकाशिक तन्तु (ऑप्टिकल फाईबर) में भी पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना होती हैं

(iii) पकीर्णन – प्रकीर्णन के कारण समुद्र तथा आकाश का रंग नीला दिखाई पड़ता है तथा सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग लाल दिखाई पड़ता है।

(iv) व्यक्तिकरण – साबुन के बुलबुलों का रंगीन तथा जल की सतह पर फैली हुई कैरोसिन तेल का सूर्य के प्रकाश में रंगीन दिखाई पड़ना, व्यक्तिकरण के कारण होता है।

मानव नेत्र एवं दृष्टि दोष Samanya Vigyan in Hindi

मानव नेत्र एवं दृष्टि दोष से बनने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न जिन्हे आपको जरूर याद करना चाहिए|

मानवे नेत्र एक कैमरे के समान कार्य करती है तथा आँख में प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है।

रेटिना में प्रकाश संवेदी कोशिकाएँ होती हैं जिनमें दण्ड और शंकु प्रमुख हैं।

शंकु (Cones) तीव्र प्रकाश में संवेदी है जबकि मन्द प्रकाश में अक्रिय होती हैं

दण्ड (Rods) कोशिका मंद प्रकाश के प्रति संवेदी है तथा प्रकाश में बहुत कम -संवेदी है।

अन्धेरे अथवा काफी कम प्रकाश में वस्तुओं को दण्ड कोशिका द्वारा देखा जाता है। निकट दृष्टि दोष से ग्रसित आँख निकट की परन्तु स्पष्ट देख सकती है परन्तु दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं देख सकती है।

दूर दृष्टि दोष से ग्रसित आँख दूर की वस्तु स्पष्ट देख सकती है परन्तु निकट की वस्तु साफ-साफ नहीं देख सकती है।

निकट दृष्टि दोष को अवतल लेंस द्वारा तथा दूर दृष्टि दोष को उत्तल लेंस द्वारा दूर किया जाता है।

जरा दृष्टि दोष को बाइफोकल लेंस द्वारा दूर किया जाता है।

अबिन्दुकता (दृष्टि वैषम्य) को दूर करने हेतु बेलनाकार लेंस का प्रयोग कियाजाता है।

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